18। खोई हुई मासूमियत

लिली का नज़रिया

मैंने उसके चुंबन को इतनी बेताबी से चाहा था कि जब वो आखिरकार मिला, तो उसे छोड़ देने का खयाल भी सहन नहीं हो रहा था—कभी नहीं, दोबारा नहीं। उसके होंठों ने मेरे होंठों को गहरी, अडिग हक़ जताते हुए थाम लिया, उसकी मुलायम ज़बान मेरी ज़बान में उलझती चली गई, जैसे पहली बार मेरा हर कोना टटोलकर उ...

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